नोएडा की एक सच्ची कहानी
नोएडा सेक्टर-62 में रहने वाली रीना शर्मा (28) पहली बार माँ बनी थी।
उसका दो साल का बेटा आरव हर सर्दी में बीमार पड़ जाता था।
नाक बहना, खाँसी, कभी बुखार — ऐसा लगता था जैसे हर 10-15 दिन में उसे डॉक्टर के पास जाना ही पड़ता है।

उसके पति अमित शर्मा अक्सर कहते थे –
“इतना ढकने की क्या जरूरत है? हम भी तो ऐसे ही बड़े हुए हैं।”
एक रात आरव को तेज खाँसी हुई।
रीना घबराकर बोली —
“मुझे लग रहा है, हम कुछ गलत कर रहे हैं।”
अगले दिन डॉक्टर ने जो कहा, उसने उनकी सोच बदल दी —
“बच्चे ठंड से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी लापरवाहियों से बीमार होते हैं।”
यहीं से उन्होंने समझा कि
ठंडी में बच्चों की देखभाल कैसे करें जानना आज के समय में कितना जरूरी है।
🩺 डॉक्टर की राय – ठंड में बच्चे जल्दी क्यों बीमार पड़ते हैं?
AIIMS दिल्ली की बाल रोग विशेषज्ञ
डॉ. निधि अग्रवाल (MD Pediatrics) बताती हैं:
“सर्दियों में बच्चों की नाक और गले की अंदरूनी परत सूखी हो जाती है, जिससे वायरस को शरीर में घुसने का मौका मिल जाता है। बच्चों की immunity पूरी तरह mature नहीं होती, इसलिए वे जल्दी बीमार पड़ते हैं।”
2024 NCR Pediatric Health Survey
- 69% बच्चों को cold-cough
- 47% बच्चों को बार-बार fever
- 34% बच्चों को chest congestion
🤧 ठंड में बच्चों को होने वाली आम परेशानियाँ
- नाक बहना
- गले में खराश
- खाँसी
- छाती में जकड़न
- बुखार
- कान दर्द
- नींद में बेचैनी
🧥 कपड़े कैसे पहनाएं? (यहाँ सबसे बड़ी गलती होती है)
रीना बताती है,
“मैं एक मोटा स्वेटर पहनाकर समझती थी कि बच्चा safe है, लेकिन वह पसीना भी करता था और फिर ठंड भी लग जाती थी।”
सही तरीका:
- अंदर सूती बनियान
- ऊपर हल्का स्वेटर
- बाहर जैकेट
- मोज़े जरूर
- सिर और कान ढके रहें
🥣 ठंड में बच्चों को क्या खिलाएँ? (Immunity बढ़ाने वाला खाना)
रीना बताती है कि जब उसने आरव के खाने में थोड़े बदलाव किए, तभी उसकी तबीयत बेहतर होने लगी।
| खाना | क्यों जरूरी है |
|---|---|
| हल्दी वाला दूध | सूजन कम करता है |
| दाल-सब्ज़ी सूप | शरीर को गर्म रखता है |
| घी वाली रोटी | ताकत देता है |
| संतरा, मौसमी | Vitamin-C से भरपूर |
| गुनगुना पानी | गला साफ रखता है |
🌿 घरेलू नुस्खे (1 साल से ऊपर के बच्चों के लिए)
- शहद + तुलसी का रस
- अदरक का हल्का काढ़ा
- हल्की भाप (2–3 मिनट)
🚫 सर्दी में ये गलतियाँ बिल्कुल न करें
- फ्रिज का ठंडा दूध न दें
- नंगे पैर फर्श पर खेलने न दें
- सुबह खाली पेट ठंडा पानी न दें
- रात में गीले कपड़े न पहनाएँ
- बिना टोपी-मफलर के बाहर न भेजें
🌫️ प्रदूषण और स्मॉग का असर
दिल्ली–NCR में सर्दियों में smog बढ़ जाता है।
इससे बच्चों की साँस की नली और कमजोर हो जाती है।
इसलिए बहुत ज्यादा smog वाले दिन बच्चों को सुबह-शाम बाहर खेलने न भेजें।
🤒 अगर बच्चा बीमार हो जाए तो क्या करें?
रीना बताती है कि पहले वह घबरा जाती थी और खुद से ही सिरप या दवा देना शुरू कर देती थी।
लेकिन डॉक्टर ने उसे साफ-साफ समझाया कि बच्चों के मामले में यह सबसे बड़ी गलती हो सकती है।
अगर बच्चे में ये लक्षण दिखें:
- लगातार नाक बहना
- खाँसी 2 दिन से ज्यादा
- बुखार 100°F से ऊपर
- दूध या खाना न लेना
- बहुत ज्यादा सुस्ती
तो सबसे पहले ये कदम उठाएँ:
घर पर तुरंत क्या करें?
- बच्चे को आराम करवाएँ
- गुनगुना पानी या सूप दें
- हल्की भाप दिन में 1–2 बार
- शरीर गर्म रखें
- खुद से antibiotic बिल्कुल न दें
अगर 24 घंटे में बुखार कम न हो,
या खाँसी और सांस फूलने लगे,
तो तुरंत pediatrician से मिलें।
👨⚕️ REAL CASE STUDY – आयुष (3 साल, गाजियाबाद)
आयुष को हर सर्दी में chest infection हो जाता था।
उसकी माँ बताती है,
“हर महीने doctor के पास जाना पड़ता था।”
डॉक्टर ने उसकी routine बदली:
- ठंडा दूध बंद
- बाहर खेलने का समय बदला
- रात में हल्की भाप शुरू
- layering वाले कपड़े पहनाने लगे
इस साल पूरी सर्दी आयुष बीमार नहीं पड़ा।
🏡 घर का माहौल भी बहुत मायने रखता है
- कमरे में बहुत ज्यादा ठंडी हवा न रखें
- पंखा बहुत तेज न चलाएँ
- heater के सामने बहुत देर न बैठाएँ
- रात को सिर ढका रहे
🙋♀️ आम सवाल (FAQ)
Q1. रोज़ नहलाएँ या नहीं?
2–3 दिन में गुनगुने पानी से नहलाना सही है।
Q2. भाप safe है?
हाँ, लेकिन बहुत हल्की और छोटे समय के लिए।
Q3. Vitamin syrup देना चाहिए?
डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं।
Q4. ठंड में पार्क ले जाएँ?
धूप में ले जा सकते हैं, लेकिन smog वाले दिन नहीं।
Q5. रात में खाँसी क्यों बढ़ती है?
सूखी ठंडी हवा throat को irritate करती है।
👩⚕️ डॉक्टर की आख़िरी और सबसे ज़रूरी सलाह
Dr- Nidhi Agarwal साफ शब्दों में कहती हैं:
“ठंड में बच्चों को बीमार होने से बचाने के लिए सबसे ज़रूरी है – सही कपड़े, गर्म खाना, साफ हवा और समय पर आराम।
बच्चे की immunity को मजबूत रखना ही असली सुरक्षा है।”
वह माता-पिता को यह भी सलाह देती हैं कि सर्दियों में बच्चों को बाहर भेजते समय उनका गला, कान और पैर ढकना अनिवार्य है, क्योंकि सबसे पहले ठंडी हवा इन्हीं हिस्सों से शरीर में असर डालती है।
🌱Conclusion
Reena की कहना है,
“पहले मैं सर्दी के मौसम से डरती थी।
हर खाँसी, हर छींक मुझे डराने लगती थी।
लेकिन जब मैंने सही तरीके से देखभाल करना सीख लिया, तब समझ आया कि सर्दी दुश्मन नहीं है — लापरवाही दुश्मन है।”
आज उसका बेटा आरव पूरे सर्दी के मौसम में healthy रहता है,
खुश रहता है, और बहुत कम बीमार पड़ता है।
आप भी आज से छोटे-छोटे बदलाव शुरू कीजिए —
क्योंकि आपका बच्चा आपकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है ❤️