Health Desk | Special Report
देश के बड़े अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों के अनुसार, किडनी से जुड़ी समस्याओं में बढ़ोतरी हुई है, जो सीधे तौर पर विटामिन D सप्लीमेंट्स के लंबे समय तक इस्तेमाल से जुड़ी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज़ इस बात से अनजान हैं कि वे “अपनी सेहत के लिए” जो सप्लीमेंट्स ले रहे हैं, वे धीरे-धीरे उनकी किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, विटामिन ओवरडोज से किडनी को गंभीर नुकसान होने का खतरा अब केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अस्पतालों में दिखने वाला एक वास्तविक पैटर्न बन चुका है।
अस्पतालों में डॉक्टर क्या अनुभव कर रहे हैं
दिल्ली स्थित बड़े सरकारी अस्पतालों में काम कर रहे डॉक्टरों के अनुसार, जब किडनी फंक्शन खराब होने की वजह खोजी जाती है, तो कई बार मरीज की रिपोर्ट्स से पहले उसकी आदतें कारण बताती हैं।
एक वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट बताते हैं कि अक्सर ओपीडी में आने वाले मरीज यह कहते सुनाई देते हैं,
“डॉक्टर साहब, मैं तो सिर्फ विटामिन ही ले रहा था।”
डॉक्टरों का अनुभव है कि:
- मरीज विटामिन को दवा नहीं मानते
- लंबे समय तक खुद से खुराक तय करते रहते हैं
- और लक्षण दिखने पर भी सप्लीमेंट बंद नहीं करते
यही वजह है कि कई केस शुरुआती स्तर पर पकड़ में नहीं आते।
AIIMS में सामने आया क्लीनिकल पैटर्न
AIIMS के नेफ्रोलॉजी विभाग में कार्यरत डॉक्टरों के अनुसार, बीते एक-दो वर्षों में ऐसे कई मरीज सामने आए जिनमें किडनी फंक्शन धीरे-धीरे बिगड़ता गया। विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री लेने पर यह बात सामने आई कि मरीजों ने महीनों तक हाई-डोज विटामिन सप्लीमेंट्स लिए थे।
एक डॉक्टर के अनुसार,
“कई मरीजों को तब झटका लगता है जब उन्हें बताया जाता है कि उनकी किडनी की समस्या का कारण कोई बड़ी बीमारी नहीं, बल्कि लंबे समय तक लिया गया सप्लीमेंट हो सकता है।”
निजी अस्पतालों में भी यही अनुभव
गुड़गांव स्थित एक बड़े निजी अस्पताल के किडनी विशेषज्ञों ने भी इसी तरह के अनुभव साझा किए हैं। अस्पताल के आंतरिक आंकड़ों के अनुसार, 2023 में केवल एक ही वर्ष के दौरान 47 ऐसे मरीज दर्ज किए गए, जिनमें किडनी से जुड़ी परेशानी और लंबे समय तक विटामिन सप्लीमेंट लेने का स्पष्ट इतिहास पाया गया।
डॉक्टरों का कहना है कि इनमें से कई मरीज पहली बार तब सतर्क हुए, जब जांच रिपोर्ट में किडनी फंक्शन सामान्य से कम पाया गया।
एक केस स्टडी: जब ‘सिर्फ विटामिन’ भारी पड़ गया
दिल्ली के एक अस्पताल में दर्ज एक मामले में, 45 वर्षीय व्यक्ति लगातार थकान और बार-बार पेशाब की शिकायत के साथ पहुंचा। मरीज को न तो डायबिटीज थी और न ही ब्लड प्रेशर।
जांच के दौरान डॉक्टरों ने उससे उसकी दिनचर्या और दवाओं के बारे में पूछा। तब पता चला कि वह पिछले कई महीनों से बिना किसी जांच के नियमित रूप से हाई-डोज विटामिन सप्लीमेंट ले रहा था।
आगे की जांच में किडनी फंक्शन प्रभावित पाया गया। इलाज के बाद स्थिति स्थिर हुई, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार कुछ बदलाव लंबे समय तक बने रहे।
डॉक्टरों का मानना है कि अगर सप्लीमेंट का सेवन समय रहते रोका गया होता, तो नुकसान सीमित रह सकता था।
डॉक्टरों के अनुभव में शुरुआती लक्षण क्यों नजरअंदाज होते हैं
चिकित्सकों का कहना है कि विटामिन ओवरडोज से जुड़ी परेशानी का सबसे बड़ा खतरा यही है कि इसके शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य लगते हैं।
डॉक्टरों के अनुभव के अनुसार, मरीज अक्सर इन संकेतों को गंभीर नहीं मानते:
- ज्यादा प्यास लगना
- बार-बार पेशाब
- हल्की थकान
- भूख कम लगना
कई मरीज इन्हें उम्र, तनाव या कमजोरी का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
कौन लोग सबसे ज्यादा जोखिम में पाए गए
अस्पतालों के रिकॉर्ड और डॉक्टरों के प्रत्यक्ष अनुभव के आधार पर, ऐसे मामले अधिकतर इन समूहों में देखे गए:
- बिना डॉक्टर की सलाह सप्लीमेंट लेने वाले
- फिटनेस या इम्यूनिटी के नाम पर हाई-डोज लेने वाले युवा
- पहले से हल्की किडनी समस्या वाले बुज़ुर्ग
- लंबे समय तक बिना जांच सप्लीमेंट जारी रखने वाले लोग
विशेषज्ञों का कहना है कि जानकारी की कमी इस समस्या की सबसे बड़ी वजह है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सामूहिक राय
किडनी विशेषज्ञों और पब्लिक हेल्थ डॉक्टरों की राय में, विटामिन की कमी जितनी चिंता का विषय है, उतना ही बड़ा जोखिम उसका अनियंत्रित सेवन भी है। डॉक्टरों का कहना है कि सप्लीमेंट को “सुरक्षित आदत” मान लेना गलत धारणा है।
उनके अनुभव के अनुसार, अधिकतर मामलों में समस्या की जड़ जानकारी की कमी और खुद से लिया गया फैसला होता है।
निष्कर्ष
अस्पतालों में सामने आ रहे मामलों, डॉक्टरों के अनुभव और क्लीनिकल पैटर्न यह स्पष्ट करते हैं कि विटामिन ओवरडोज से किडनी को गंभीर नुकसान होने का खतरा वास्तविक है। यह समस्या किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि एक बढ़ती हुई स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है।
यह लेख डर फैलाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि अस्पतालों में देखे गए वास्तविक अनुभवों के आधार पर जनहित में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रस्तुत किया गया है।